पोर्न - भारत में बढ़ते रेप की असली वजह

पोर्न

टाइटल देख कर आपको लग रहा होगा कि भला पोर्न देखने रेप कैसे हो सकते है...?? क्या पोर्न देखने वाला हर इन्सान रेपिस्ट है..?? अगर ऐसा है तो यूरोपियन देशो में पोर्न लीगल क्यों है...?
जैसे जैसे आप इस ब्लॉग को पढेंगे, इन सवालो के जवाब भी आपको मिल जायेंगे और साथ ही साथ रेप व पोर्न का कनेक्शन भी आपको समझ आ जायेगा.

कुछ दिनों बाद रक्षा बंधन आने वाला है. फिर कुछ महीनो बाद नवरात्रे आने वाले है, दशहरा आने वाला है. साफ़ साफ़ कहूँ तो ढोंग करने का, दिखावा करने का सीजन शुरू होने वाला है. आपको ये पढ़ कर शायद बुरा लग रहा होगा, लेकिन इससे भी ज्यादा बुरा मुझे लगता है जब रोजाना अखबारों में बलात्कार की खबरे देखता हूँ. बड़ी अजीब बात है ना कि भारत जैसे धार्मिक देश में रोजाना इतने रेप हो जाते है, जहाँ रक्षाबंधन के दिन एक भाई अपनी बहन की रक्षा का प्रण लेता है. जहाँ नवरात्रों में छोटी छोटी बच्चियों को देवी मानकर पूजा जाता है, जहाँ दशहरे पर उस इंसान का पुतला जलाया जाता है, जिसने सीता जी का सिर्फ अपहरण किया था. उसी भारत में रोजाना हजारो लडकियां रेप व छेड़छाड़ की शिकार बन रहीं है. सुबह सुबह अख़बार पढने का मन नहीं करता. लेकिन क्या करू, लाचार हूँ. कुछ नहीं कर सकता, रोजाना ऐसी खबरे पढने की आदत जो बन गयी है. 

 

Rape Cases In India

 

आप जब कहीं रेप की खबर पढ़ते होंगे या देखते होंगे तो जॉली एलएलबी मूवी का वो डायलोग जरुर आपके दिमाग में आता होगा - "कौन है ये लोग, कहाँ से आते हैं ये"
चिंता ना करें, इसका जवाब मिल गया है कि कौन है, कहाँ से आते है. बस आप इसे आखिर तक पढ़े.

 

पिछले 2-3 सालो में भारत में रेप का ग्राफ बहुत तेज़ी से बढ़ा है. पिछले साल एक सर्वे ने तो यह दावा तक कर दिया था कि भारत महिलाओ के लिए दुनिया का सबसे असुरक्षित देश है. मुझे महिलाओं का तो पता नहीं लेकिन अब छोटी छोटी बच्चियों के लिए जरुर सबसे असुरक्षित देश बन गया है. कुछ सालो पहले लोग कहते थे कि लड़कियों के छोटे कपडे पहनने से और रात में बाहर घुमने से उनके साथ रेप होते है. अब जब छोटी छोटी बच्चियों के साथ ये केस बढ़ रहे है तो वही लोग कह रहे है कि लोगो की मानसिकता ख़राब है. और आज कल तो जिससे पूछो यही कहता है कि लोगो की छोटी सोच और गलत मेंटेलिटी की वजह से रेप बढ़ रहे है. 


जी बिलकुल मैं खुद मानता हूँ कि लोगो की ओछी सोच और गन्दी मानसिकता की वजह से रेप हो रहे है. लेकिन पिछले कुछ सालो में लोगो की सोच में इतनी गंदगी कहाँ से आ गयी कि  वो अब दुध्मुहीं नवजात को भी अपनी हवस का शिकार बना रहें है. कहाँ से आ रही है ये गंदगी कि लोग ना रिश्ते देख रहे है, ना ही उम्र. इसका जवाब है - हम दिन भर में क्या देख रहे है और क्या सुन रहे है. इसी से हमारी सोच बनती है.

 

 

आज के टाइम हर इंसान के पास स्मार्टफ़ोन है. चाहे वह एक दिहाड़ी मजदूरी करने वाला ही क्यों न हो. उसके पास भी एक स्मार्टफोन मिलेगा वो भी प्रतिदिन एक जीबी इन्टरनेट के साथ. जियो के आने के बाद भारत में इन्टरनेट यूज़र्स बहुत तेजी से बढे है. और साथ ही साथ इन्टरनेट पर अडल्ट (अश्लील) कंटेट भी काफी बढ़ा है. कभी आपने नोटिस किया है कि ज्यादातर (90 प्रतिशत) रेप के मामलो में रेपिस्ट वो होते है जो पढ़े लिखे नहीं है, जागरूक नहीं है या नशा करते है. यही कारण है कि ज्यादातर रेप केस गाँवों में दर्ज होते है. एक बात तो साफ़ है कि इन्टरनेट पर अश्लील कंटेट के ज्यादातर यूजर्स वे लोग है जो अवेयर नही है. क्योंकि ये सब अचानक (जियो के आने के बाद) से उसके हाथ में आया है. आज कल सब के पास इन्टरनेट है, चाहे अमीर हो, गरीब हो. पढा लिखा हो या अनपढ़ हो.

 

 

आप खुद ही देखिये अपने फ़ोन में रोजाना कितने ही अडल्ट कंटेट के नोटीफिकेशन आते है. "फलाना मूवी का ये बोल्ड सीन देखकर आप रह जायेंगे दंग, आप भी देखे" , "देवर ने भाभी के साथ किया कुछ ऐसा , जानकर रह जायेंगे हैरान", "फलाना मूवी की ये एक्ट्रेस शादी से पहले हुई प्रेग्नेंट"

 


मतलब इन कंटेंट्स के टाइटल इस तरह के होते है जो लोगो का ध्यान खीचे. ब्राउजर में ऐसे नोटीफिकेशन की लाइन लगी होती है. और लोग बिना सोचे समझे उन पर क्लिक कर देते है . फिर ऐसा कंटेंट देखने और पढने बाद उनकी उत्सुकता ओर ज्यादा बढती है. फिर वो गूगल पर सर्च करते है, हॉट सीन, सेक्स. फिर क्या.......लग जाती है पोर्न साइट्स की लाइन. 

 


अब मैं बात करता हूँ टीनेजर्स की, जो अभी स्कूल में पढ़ रहे है. मान लिया कि उनके पास मोबाइल फ़ोन नहीं है, लेकिन घर पर टीवी तो देखते ही होंगे. आज कल के टीवी सीरियल ( सो कॉल्ड फॅमिली शोज) में क्या दिखाया जा रहा है. रोमांस के नाम पर लड़का-लड़की बाँहों में बाहें डालकर एक साथ जीने मरने की कसमे खा रहे है. इन्ही टीवी सीरियल में आज कल "किस" करना आम हो गया है. इन्ही टीवी सीरियल में दिखाया जाता है कि कैसे एक कॉलेज स्टूडेंट को अपनी टीचर से प्यार हो जाता है, और उसके पीछे लार टपकता घूमता रहता है. फिर आता है दो मिनट का ब्रेक - उसमे आता है सनी लिओनी (सो कॉल्ड सेलेब्रेटी) का कंडोम वाला एड. फिर आता है रणवीर सिंह का शेम्पू वाला विज्ञापन जिसमे वो शेम्पू से लड़की पटाने के टिप्स देता है.

 

अब आप ही बताइए, स्कूल में पढने वाले स्टूडेंट्स इन सबसे क्या सीखेंगे. क्या आपको नहीं लगता कि इस टीनएजर ऐज (किशोरावस्था) में उनका ध्यान ऐसे कंटेंट की तरफ जायेगा. जी बिलकुल जाएगा...!! वो भी अभी ऐसे कंटेंट को लेकर अवेयर नही है. उनमे भी ऐसा कंटेंट वापस देखने की उत्सुकता बढ़ेगी. और ये बढ़ना स्वाभाविक है क्योंकि हमने कभी भी उनको सेक्स एजुकेशन के बारे में जागरूक नही किया. न तो हमारी स्कूल कॉलेजों में, ना ही हमारी सोसाइटी में और न ही हमारे घरो में. कहीं भी सेक्स एजुकेशन के बारे में बात तक नहीं करते. इसी सेक्स एजुकेशन की कमी के कारण हमारी इच्छाएं ओर ज्यादा बढती है, यह जानने को....... कि अगली स्टेप क्या होगी. देखा जाये तो हम सब एडल्ट कंटेंट से घिरे हुए है. लेकिन लगता नहीं है क्योंकि इन सबको हमने अपना लिया है. चाहे वो इन्स्टाग्राम पर अडल्ट पेज हो या नेटफिलिक्स की वेबसीरीज, टीवी सीरियल हो या वहाँ दिखाए जाने वाले विज्ञापन. हर जगह सिर्फ यही परोसा जा रहा है. मुझे इन सब से कोई दिक्कत नहीं है. 

 

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दिक्कत ये है कि लोग सेक्स को लेकर अवेयर नहीं है. एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो सालो में टॉप पोर्न साइट्स पर भारतीय यूजर्स की संख्या बहुत बढ़ी है और बढती ही जा रही है और वहाँ पर सर्च किये जाने टॉप कीवर्ड भी इंडियन है. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोग अकेले में मोबाइल पर क्या करते है. ये तो छोडिये......पिछले साल कानपुर में एक 6 साल की लड़की के साथ गेंगरेप का मामला सामने आया था. और रेप करने वाले उसी के दोस्त थे जिनकी उम्र 10 साल से कम थी और सबसे चौकाने वाली बात यह कि वे सब लडके पोर्न के एडिक्ट थे. पुलिस रिपोर्ट की माने तो उनमे से एक जने के फ़ोन में तो बकायदा पोर्न मूवीज थी. खेलने कूदने की उम्र में वो नादान रेपिस्ट बन गए.
इंडिया टुडे मेग्जिन में एक बार पोर्नोग्राफी पर हुए एक सर्वे की रिपोर्ट आई थी. उस रिपोर्ट के अनुसार 75 प्रतिशत भारतीय लड़के पोर्न देखने के तुरंत बाद किसी भी लड़की के साथ सेक्स करने की इच्छा रखते है.

 

 

ये सारी पोर्न साइट्स पश्चिमी देशो की देन है. और ये वहां पर लीगल (वैध) है. यहाँ तक कि इन देशो में पोर्न की पूरी इंडस्ट्री है, और ये अभी से नहीं, बहुत पहले से है. फिर भी इन देशो में रेप बहुत कम होते है, और छोटी छोटी मासूमो के साथ तो बिलकुल भी नहीं होते. क्योंकि वहां पर प्रॉपर सेक्स एजुकेशन है, वहां हर कोई सेक्स को लेकर अवेयर है, चाहे गरीब हो या अनपढ़. उन देशो में पहले सेक्स अवेयरनेस आई, फिर इन्टरनेट आया. हमारे भारत में लोगो के पास फुल इन्टरनेट मिलेगा, लेकिन सेक्स एजुकेशन जीरो. इसीलिए रोजाना इतने रेप हो रहे है. अब आपको पता लग गया होगा कि लोगो की मानसिकता क्यों खराब होती जा रही है.

 

लड़कियों को "टापना" और उनको "स्कैन करना".......!! कहाँ से आये है ये शब्द...??
स्कैन करना मतलब क्या....लडकी को गन्दी नियत से देखना और उसकी इमेजिनेशन करना और इमेजिनेशन क्यों करना...क्योंकि हम दिन भर ऐसा ही कंटेंट देखते रहते है, ओर जैसा देखेंगे वैसा ही सोचेंगे. मुझे किसी से कोई आपत्ति नहीं है. कोई कुछ भी देख सकता है, कुछ भी पढ़ सकता है. लेकिन कभी भी किसी लड़की के साथ गलत मत करना, चाहे वो रेप हो, छेड़छाड़ हो या सेक्स के लिए रिलेशनशिप में आना हो.

 

आज भी भारत में ऐसे कितने ही लोग है जो लड़की को सिर्फ जरुरत समझते है और वो भी सेक्स के लिए. जब इन लोगो के पोर्न हाथ लगती है......फिर क्या अकेली लड़की देख अपनी जरुरत पूरा कर लेते है और अगले दिन अख़बार में न्यूज छप जाती है. यही तो हो रहा है. इसमें इन्टरनेट की कोई गलती नहीं है, न ही पोर्न वेबसाइट्स की. बढती टेक्नोलॉजी के साथ इन्टरनेट का आना लाजमी है. लेकिन इससे पहले हम सबको एक प्रॉपर सेक्स एजुकेशन और अवेयरनेस की जरुरत है. लोगो के दिमाग में लडकी को लेकर जो सोच बनी हुई है, उसको बदलना जरूरी है. तब जाकर हम इस दरिंदगी वाले अपराध पर काबू पा सकेंगे. नहीं तो फिर कितनी कैंडल मार्च निकल लो, कितने ही धरने प्रदर्शन करलो. कुछ नही होने वाला.

 

सरकार सिर्फ इतना कर सकती है कि रेप करने वालो के खिलाफ कोई सख्त कानून लाये ताकि रेपिस्ट रेप करने से पहले दस बार सोचे. लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है, लोगो को सेक्स एजुकेशन देना और लड़की को एक इंसान के रूप में देखना ना कि एक जरूरत. फिर ना तो रेप होंगे, ना ही ब्रेक-अप.

 

Sanket Sharma

2 weeks ago

Great Article...!

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