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कैसे हम एक बेहतर रिलेशनशिप बना सकते है.

कैसे

आज कल की युवा पीढ़ी के लिए "रिलेशनशिप" एक ऐसा टैग है जिसे हर कोई पाना चाहता है। हर कोई रिलेशनशिप में आना चाहता है चाहे लड़का हो या लड़की। क्या रिलेशनशिप वाकई इतनी आसान है जितना हम सोचते है..?? क्या रिलेशनशिप में आने से पहले हम इसको अच्छे से समझते है या नहीं..?? 

तो आज यहां रिलेशनशिप को लेकर ऐसी ही कुछ रोचक बातें होने वाली वाली है, इसलिए इस आर्टिकल जरूर पूरा पढ़े और अपने दोस्तो साथ शेयर करे।

जब हम आज कल की युवा पीढ़ी की बात करते है तो ये वो लोग है जिनके दिमाग को उनके हार्मोन्स ने हाईजैक कर लिया है। ये उम्र ही ऐसी होती है कि जिसमें दो अपोजिट सेक्स एक दूसरे की तरफ आकर्षित होते है, तो हर कोई इस टेम्पररी प्लेजर के लिए रिलेशनशिप में आना चाहता है। हमें समझना चाहिए कि रिलेशनशिप अलग अलग जरूरतों के लिए बनाए जाते है, शारीरिक जरूरतें होती है, मानसिक जरूरतें होती है, भावनात्मक जरूरतें होती है, कई तरह की जरूरतें होती है लेकिन जब आप रिलेशनशिप की बात करते है तो आमतौर पर लोग शरीर पर आधारित रिश्तों के बारे में सोचते है। अगर उस रिलेशनशिप का आधार बस शरीर है तो आमतौर पर एक दूसरे  के शरीर को लेकर रोमांस कुछ समय बाद खत्म हो जाता है। जब लोगो की शारीरिक इच्छाएं पूरी होने लगती है, तो एक दूसरे से बुरा बर्ताव करने लगते है, क्योंकि देखा जाए तो ऐसी रिलेशनशिप का मकसद सिर्फ अपने साथी से मिठास खींचना या उसकी खुशी निचोड़ना होता है। अगर आपकी खुशी किसी के शरीर पर निर्भर है तो कुछ समय बाद देखा जाता है कि जब उससे वहीं नतीजे नहीं निकलते जो शुरुआती रिलेशनशिप में निकलते थे तो रिलेशनशिप में कुछ कड़वाहट आ जाती है।

जब लोग रिलेशनशिप में आते है तो वो रोजाना एक दूसरे को कई बाते शेयर करते है और कई बार छोटी छोटी बातो पर ही मतभेद होना शुरू हो जाते है, ये होना ही है क्योंकि उनको को लगता है कि  वे मैनेज कर लेंगे लेकिन वे नहीं कर पाते। बेहतर यह है कि खुद को इस तरह मैनेज करो कि आप अपने अंदर से खुश और मधुर हो, तो रिलेशनशिप बहुत मजबूत होगी और रिलेशनशिप जरूरत पर आधारित नहीं होगी।
जब रिलेशनशिप जरूरतों पर टिकी होती है तो अपनी जरूरत पूरी ना होने पर आप चिड़चिड़े इंसान बन जाएंगे, आप शिकायत करना शुरू कर देंगे।

दुर्भाग्य से आज हम ऐसे मुकाम पर पहुंच गए है जहा आपको लगता है कि रिलेशनशिप में होने का मतलब शरीर पर आधारित होना या उसमे शरीर का कुछ हिस्सा शामिल होना चाहिए। हमको यह समझना चाहिए कि शरीर हमारे जीवन का एक हिस्सा है, हमारे लिए शरीर के अलावा दूसरे आयाम भी है, हमारे पास दिमाग है, इमोशंस है, और साथ ही साथ इं सब चीजों की जागरूकता भी है। और यही सब चीजे हम इंसानों को जानवरो से अलग बनाती है।


रिलेशनशिप शब्द इस्तेमाल सिर्फ शारीरिक रिश्तों के लिए करना गलत है...और ये ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कहीं ना कहीं आपने वेस्ट्रन कल्चर को अपना लिया है, वहां रिलेशनशिप का मतलब है कि उससे अपोजिट सेक्स या सिर्फ शारीरिक संबंध। क्या हम किसी के शरीर को पुचकारे बिना लोगो के साथ करीबी और गहरे रिश्ते नहीं बना सकते..?? 
एक इंसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू है हमारी समझ, हमारे इमोशंस, हमारी जागरूकता, ये बड़ी चीजे है। शरीर बस उसका एक हिस्सा है।
मै मानता इंसानों के जीवन में प्यार एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि इमोशंस इंसान होने का एक मजबूत पहलू है। प्यार एक इमोशन है और हम कह सकते है कि है एक इमोशन की मिठास है जिसे हम प्यार के नाम से जानते है। लेकिन आजकल का ज्यादातर प्यार जिस्मानी है जहां सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी होती है। और फिर यही से रिलेशनशिप में कड़वाहट पनपती है। इसलिए जरूरी है कि हम उम्मीद कम के और अपने इमोशन को अच्छा बनाए रखे ताकि लोग दुनिया में सच्चे प्यार भरोसा कर सके।
अगर ये ही इमोशन कड़वा हो जाए तो इसे हम नफरत कहते है। वास्तव में देखा जाए तो हम जिससे प्यार करते है नफरत भी उसी से करते है। एक छोटी सी गड़बड़ी होते ही वहीं प्यार नफरत बन जाता है। आपको किसी से प्यार करने की जरूरत नहीं है...बस अपने इमोशंस को मधुर बनाना है। और अगर आपकी भावनाएं मधुर है तो आप इसे दूसरे लोगो के साथ इस तरह के इमोशंस शेयर करते है और इसे ही हम प्यार कहते है। अगर आपकी भावनाएं अच्छी है तो हर कोई आपकी तरफ आकर्षित होगा। अगर आपकी भावनाएं बुरी है तो जाहिर है कि आप लोगो के साथ भी वही बाटेंगे।
आपको किसी से प्यार करने की जरूरत नहीं है...बस अपने इमोशंस को मधुर बनाना है। और अगर आपकी भावनाएं मधुर है तो आप इसे दूसरे लोगो के साथ  इमोशंस शेयर कर सकते है इसे है हम प्यार कहते है। अगर आपकी भावनाएं अच्छी है तो हर कोई आपकी तरफ आकर्षित होगा। अगर आपकी भावनाएं बुरी है तो जाहिर है कि आप लोगो के साथ भी वही बाटेंगे
अगर आप कहते है कि मै किसी से प्यार करता हूं या करती हूं तो आप जिनसे प्यार करते है उनके बारे में जरूरत से ज्यादा बढ़ा चढ़ा कर सोचते है और आप उनकी अच्छाइयों को बढ़ा चढ़ा लेते है। अगर आप कहते है कि मै किसी से नफरत करता हूं तो आप उनकी बुराइयों को बढ़ा चढ़ा लेते है। आप किसी भी चीज को उसके असली रूप में नहीं देख पाते है। लोग जिन चीजों से प्यार करते है। उनके लिए अंधे हो जाते है, वो अपनी सारी समझ गंवा देते है। इसलिए जरूरी है कि जो जैसा है उसको वैसा ही उसके असली रूप में देखे। जब आप किसी के साथ अच्छे से पेश आते है, इसलिए नहीं कि सामने वाला अच्छा है। इसलिए कि आपकी भावनाएं बहुत मधुर है। यहां ज्यादा संभावना है किसी भी मजबूत रिलेशनशिप के लिए।
अगर मान लो मै आपके सामने अच्छे से पेश आता हूं क्योंकि आप अच्छे हो, कल अगर आप अच्छे नहीं रहे तो फिर गड़बड़ हो जाएगी।

कहने का मतलब आप अपने इमोशंस का कंट्रोल किसी दूसरे के हाथ में ना दे। मानलो कि आपको खुश होना है तो आपके साथी को वैसा बनना होगा जैसा आप चाहते है। और ये मुमकिन नहीं है, आप एक भी इंसान को मनचाहा नहीं बना सकते। आप इसकी ज्यादा कोशिश करेंगे उतनी ही आपके रिलेशनशिप ने कड़वाहट बढ़ेगी। इसलिए किसी से भी, कोई भी उम्मीद ना रखे। क्यों कि जब उम्मीद पूरी नहीं होती तो हमारे अंदर बुरी भावनाएं आ जाती है। और अगर आपके मन में कड़वाहट हो और फिर प्यार करने की कोशिश करके देखिए । ये आपको बर्बाद कर देगा। इस दुनिया में कोई परफेक्ट नहीं है, सबमें कुछ ना कुछ कमियां जरूर होती है। 
आज तक किसी को भी परफेक्ट रिलेशनशिप नहीं मिली है, और ना ही मिलने वाली। अगर आप इस तरह गलतफहमी में पड़ते है कि मैंने सही लाइफ पार्टनर पा लिया है तो आप जल्द ही निराश होने वाले है। आपको समझना चाहिए कि इस दुनिया में कोई सही व्यक्ति नहीं है, पहली चीज है यह देखना की क्या मैं बिल्कुल परफेक्ट हूं। तो आपको कोई भी परफेक्ट साथी नहीं मिलने वाला। अगर आप जुड़ाव की गहरी भावना रखे तो कुछ बढ़िया हो सकता है।


अगर देखा जाए तो आप अपने से बिल्कुल विपरीत साथी चुनते है. मगर कुछ समय बाद आप धीरे धीरे उम्मीद करने लगते है कि वे आपकी तरह हो जाए, ये एक बहुत बड़ी गलती है आज कल के रिलेशनशिप की। इसलिए अपने साथी से सच्चा प्यार करे और ऐसा कि दुनिया याद रखे। अपने साथी को बदलने के बजाय, उस पर अपनी कंडीशन थोपने के बजाय उसको समझने की कोशिश करे। और जहा समझ है वहीं प्यार है।

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