• +91 9887734748
  • info@behappykeephappy.com

आप वोटर हो या सपोर्टर...??

आप

चुनावी मौसम चल रहा है। अखबार, न्यूज चैनल्स, सोशल मीडिया, चाय की थड़ी, होर्डिंग्स..... हर जगह सिर्फ चुनाव की बातें। लगभग आधे देश में मतदान हो गया है और कुछ राज्यों में अभी चुनाव होना बाकी है। सभी बड़े नेता अंधाधुन रैलियां कर रहे है। कोई खुद को चौकीदार बता रहा है तो कोई उसको चोर बता रहा है। और कुछ जनता से वायदे कर रहे है और अपने पक्ष में वोट डालने की अपील कर रहे है। आप में से कई लोगो ने यह नोटिस किया होगा कि चुनाव आते ही किस तरह से ये नेता लोग बरसाती मेंडक की तरह अचानक से सक्रिय हो जाते है, जो पांच साल तक कभी शक्ल तक नही दिखाते। और मजे की बात ये कि फिर भी ऐसे नेता जीत जाते है। क्योंकि अब लोगो का वोट देने का तरीका बदल गया है।

आज कल जनता सांसद या विधायक का चेहरा देखकर या उनका बैकग्राउंड जानकर वोट नहीं देती। आजकल सिर्फ प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री या किसी विशेष पार्टी के पक्ष में वोट डलता है, चाहे सांसद, विधायक कोई भी हो। यहां तक कि कई जगह तो ये क्रिमिनल, अनपढ़ लोगो को टिकट दे देते है और चुनाव जीत जाते है। फिर वही जनता पांच साल तक अपने क्षेत्र में विकास के लिए मुख्यमंत्री या प्रधानमन्त्री को कोसती रहती है। जब आप सीएम या पीएम का चेहरा देखकर वोट डालेंगे तो कहा से विकास होगा। अरे भैया.... अगर आपके गांव या शहर में सड़क नहीं है तो उसको बनवाने प्रधानमन्त्री जी नहीं आएंगे। उसको बनवाने का काम वहां के विधायक या सांसद का है। लेकिन इसमें जनता भी क्या करे जब उम्मीदवार खुद ही पीएम के नाम पर वोट मांगता है। वैसे सच कहूं तो जनता ही बेवकूफ है।

वोट डालते टाइम जनता अपने उम्मीदवार के बारे में कुछ नहीं जानती और ना ही जानने कि कोशिश करती कि मैं जिसको वोट डाल रहा हूं उसका क्या बैकग्राउंड है, कहां से आया है, राजनीति का कितना अनुभव है, पिछले पांच साल में कितना काम करवाया है, कितना बकाया है...... कुछ नहीं पता.....सब जाए भाड में। वोट देंगे तो सिर्फ उम्मीदवार की पार्टी देखकर या उसकी जात देखकर....... है ना...!! यही तो करते है हम सब। फिर ये ही लोग भ्रष्टाचार, बलात्कार, आरक्षण और गरीबी को लेकर सरकार को गालियां देते रहते है और कई लोग तो यहां तक कह देते है कि इस देश का कुछ नहीं हो सकता। तो अंकल आंटी जी.....मेरा यही कहना है कि किसी विशेष पार्टी या किसी नेता के अंध भक्त मत बनिए। अपने दिमाग का इस्तेमाल करिए अगर वो भी नहीं है.....तो एक दिन का 1 जीबी डाटा तो होगा ही। गूगल पर चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर अपने उम्मीदवारों के बारे में तो जान ही सकते हैं।

लेकिन नहीं.....कोन करेगा ये फालतू का काम....! हम तो वही सोशल मीडिया पर एक दूसरे को गालियां देंगे। इस पार्टी ने ये किया, उस पार्टी ने वो किया। बिना सच जाने झूठी पोस्ट को फॉरवर्ड करेंगे, शेयर करेंगे। जाति और मजहब के नाम पर नफ़रत फैलाएंगे। और फिर इन राजनीतिक पार्टियों के आईटी सेल का काम भी तो यही है....सोशल मीडिया पर झूठी पोस्ट की बमबारी करना। और फिर हम जैसे बेरोजगार लोगो का तो काम यही है.....बिना सच्चाई जाने उस पोस्ट को शेयर करना। आपको आइडिया भी नहीं है कि आपकी एक झूठी पोस्ट से कितना नुकसान होता है, कितने ही लोग उस बात को सच मान लेते है और फिर अपने दिमाग में कट्टरवाद का बीज बो देते है।

यही तो हो रहा है आजकल..... नफ़रत इस हद तक बढ़ चुकी है कि एक पार्टी के लोग दूसरी पार्टी के लोगो को मार दे रहे है। मतलब राजनीति इतनी गन्दी हो चुकी है कि जिसकी कोई हद नहीं। और ये गंदगी नेताओ ने तो फैलाई ही है.....साथ में हमने भी कोई कसर नही छोड़ी। जैसा उन्होंने कहा, वैसा ही हमने मान लिया। जैसा उन्होंने करने को बोला, वैसा ही हमने किया। जब हम किसी विशेष पार्टी के लिए कट्टर समर्थक बन जाते है तो हम अपने दिमाग का कंट्रोल उन नेताओं के हाथो में दे देते है|

अभी कुछ दिन पहले यूपी के एक सीनियर नेता ने एक महिला उम्मीदवार के लिए अभद्र टिप्पणी की...! उस नेता का बयान इतना गंदा था कि कोई सोच भी सकता।  यह बयान एक मंच से दिया गया था जहां सामने की और जनता बैठी हुई थी। आपको विश्वास नही होगा.....लोगो ने उस अश्लील बयान का तालियों से स्वागत किया था। मतलब हम किसी नेता के इतने अंधे भक्त बन चुके है कि हमें पता ही नहीं है कि हम कर क्या रहे है। फिर ये ही तालियां पीटने वाले लोग, बेरोजगारी और गरीबी के लिए अपना सिर पीटते है।

एक तरफ महिला सशक्तिकरण को लेकर बात होती है तो वही दूसरी तरफ ये ही नेता ऐसे नीच बयान देते है। अब बात बयानबाजी की आ ही गई है तो बता दे कि इस चुनाव के दरमियान किसी भी पार्टी के नेता ने वोट पाने के लिए, लोगो को बरगलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।  कोई देश के जवानों की शहादत के नाम पर वोट मांग रहा है तो कोई अंडरवीयर का कलर बताकर। कोई मुस्लिमो को एकजुट होने की बात कर रहा है तो कोई हिन्दुओं को विशेष पार्टी में वोट डालने को कह रहा है। और लोग इनके कहे अनुसार वोट भी डालकर आ जाते है। फिर जब कही सांप्रदायिक दंगे होते है तो कहते है "हमे तो इन नेताओ ने बांट दिया"। अबे गधो.... जब पता है कि सारी फसाद की जड़ ये नेता लोग ही है तो क्यों उनको इतनी इज़्ज़त दे रहे हो, क्यो अपना काम धंधा बंद करके कड़ी धूप में उनकी रैलियों में जाते हों।

देखो..सभी पार्टियों में अच्छे बुरे नेता है। कोई भी पार्टी या नेता गंगाजल से धुला हुआ नहीं है। खुद प्रधानमन्त्री मोदी जी भी यह नहीं कह सकते है कि मैं सबसे परफेक्ट हूं। तो फिर क्यों हम किसी विशेष पार्टी या नेता को सबसे अच्छा बताने लगते है। हम सिर्फ वोटर है....हमारी राजनीतिक समझ सिर्फ इतनी होनी चाहिए कि अपने क्षेत्र के उम्मीदवारों का अच्छे से विश्लेषण करना फिर उनमें से सबसे सही उम्मीदवार को वोट देना. मेरे ख्याल से एक वोटर के लिए सिर्फ इतना ही काफी है। अगर इतनी सी समझ हम सब में आ जाए तो मैं मानता हूं कि फिर शायद अच्छे दिन आ जायेंगे। अब आप ही बताइए इसमें कहां जातिवाद है, कहां कोई पार्टी है, कहां कोई धर्म है। लेकिन ये तभी हो सकता है जब आप ये जान लो  कि सब एक जैसे है। ये लोग हर पांच साल में एक बार आते है, लोगो को दूर से ही लॉलीपॉप दिखाकर चले जाते है।

अगर आप किसी पार्टी के कट्टर सपोर्टर है तो मेरी नजर में आप अभी उस नादान बच्चे की तरह हो जिसके दिमाग का विकास होना अभी बाकी हैं। चलो मान लिया कि आप किसी पार्टी को सपोर्ट करते हो, क्यों कि आपकी नजर में वो सबसे अच्छा काम करती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि बाकी दूसरी पार्टियां गलत है यां उनके सभी नेता बैकार है। समझदारी से वोट करें। इसी में आपकी और देश की भलाई है। आखिर में यही कहना चाहूंगा कि अपने जिले के बेस्ट सांसद को चुने, अपने क्षेत्र के बेस्ट विधायक को चुने। ना कि पीएम या सीएम को.....!!

वोट आपका अधिकार है इसका सही तरीके से इस्तेमाल करे और और देश को मजबूत बनाने में सहयोग करें। अगर आपको ये आर्टिकल अच्छा लगा तो प्लीज़ अपने दोस्तो के साथ शेयर करें और नीचे कमेंट्स करके बताए कि आपको ये कैसा लगा।

 

यह भी पढ़े.........

1. तू भी इंसान, मै भी इंसान | Save Humanity, Say No to Social Media.

2. आज कल का प्यार

Leave a Comment


Recent Comments